डीएम ने खोला भूमि फर्जीवाड़े का बड़ा खेल, दो बार बेची गई विस्थापितों की भूमि
टिहरी बांध पुनर्वास परियोजना के अधिकारियों की लापरवाही उजागर, जांच के आदेश
जिलाधिकारी (डीएम) सविन बंसल ने टिहरी बांध पुनर्वास परियोजना में हुए एक बड़े भूमि फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए सख्त रुख अपनाया है। मामला शास्त्रीनगर तपोवन निवासी पुलमा देवी की शिकायत से जुड़ा है, जिन्होंने जनता दर्शन में अपनी आपबीती सुनाई।
2007 में खरीदी भूमि 2020 में फिर से बेच दी गई
पुलमा देवी ने वर्ष 2007 में ग्राम फुलसनी में 200 वर्ग मीटर की एक आवासीय भूमि खरीदी थी। उक्त भूमि टिहरी बांध से विस्थापित लोगों को आवंटित की गई थी, जिसकी बाकायदा रजिस्ट्री भी कराई गई थी। लेकिन वर्ष 2020 में उसी भूमि को पुनः एक अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया।
जांच में खुली परतें
डीएम के आदेश पर कराई गई जांच में सामने आया कि यह भूमि मार्च 2007 में चन्दरू पुत्र अमरू को ग्राम फुलसनी (खसरा नं. 399) में आवंटित की गई थी। अप्रैल 2007 में कब्जा भी दे दिया गया।
इसके बाद, चन्दरू ने 2019 में पुनः उसी भूखण्ड पर खुद को भूमिधरी दर्ज कराने के लिए आवेदन किया और अधिकारियों को गुमराह करते हुए यह तथ्य छिपा लिया कि वह यह भूमि पहले ही विक्रय कर चुका है। बिना किसी सत्यापन के, अवस्थापना (पुनर्वास) खण्ड ऋषिकेश द्वारा उसे दोबारा भूमिधरी का अधिकार दे दिया गया।
डीएम ने दिए सख्त निर्देश
इस गंभीर लापरवाही पर डीएम सविन बंसल ने:
- अधीक्षण अभियंता (टिहरी बांध पुनर्वास) का वाहन जब्त करने के निर्देश दिए।
- संपूर्ण प्रकरण की एसआईटी जांच की संस्तुति की चेतावनी दी।
- मामले की विस्तृत आपराधिक जांच के लिए उप जिलाधिकारी मुख्यालय अपूर्वा को जांच सौंपी गई।
न्याय मिलने तक नहीं रुकेगा प्रशासन
डीएम ने स्पष्ट किया है कि जब तक फरियादी पुलमा देवी को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक प्रशासन चैन से नहीं बैठेगा। इस तरह के मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई तय है।
टिहरी बांध जैसे संवेदनशील पुनर्वास परियोजनाओं में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के मामले यदि इसी तरह सामने आते रहे तो यह न केवल विस्थापितों की पीड़ा को और बढ़ाएगा बल्कि प्रशासन की साख पर भी सवाल खड़े करेगा।
जिलाधिकारी की यह त्वरित और सख्त कार्यवाही एक सकारात्मक संकेत है कि प्रशासन इस प्रकार की अनियमितताओं को बर्दाश्त नहीं करेगा।

