भूस्खलन की चपेट में आने से बाल-बाल बचे सांसद, वीडियो सोशल मीडिया में हो रहा है वायरल
उत्तराखंड में मूसलधार बारिश और भूस्खलन की वजह से मची तबाही के बीच एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। सांसद अनिल बलूनी और देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी उस समय बाल-बाल बच गए जब देवप्रयाग डिग्री कॉलेज के पास अचानक भारी भूस्खलन हो गया।
सांसद अनिल बलूनी और विधायक विनोद कंडारी उत्तराखंड में आई भीषण आपदा के बाद राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लेने के लिए क्षेत्र में पहुंचे थे। जैसे ही उनका काफिला देवप्रयाग डिग्री कॉलेज के पास पहुंचा, तभी अचानक पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा नीचे गिर पड़ा। उनका वाहन मलबे की चपेट में आने ही वाला था, लेकिन समय रहते स्थिति को संभाल लिया गया। सौभाग्यवश किसी को कोई चोट नहीं आई और दोनों नेता सुरक्षित हैं।
सांसद अनिल बलूनी का यह वीडियो सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहा है कि कैसे पहाड़ से पत्थर और मिट्टी सड़क पर आ रही है और जब यह भूस्ख्लन हुआ सांसद अनिल बलूनी पास में ही मौजूद थे।

भूस्खलन के बाद हालात को देखते हुए सांसद बलूनी को तत्काल तहसीलदार के वाहन से देवप्रयाग ले जाया गया, जहां उन्होंने निर्धारित कार्यक्रमों में भाग लिया। इसके बाद वे एक निजी वाहन से देहरादून के लिए रवाना हुए। वहीं, उनका सरकारी वाहन मलबे में फंसा हुआ है, जिसे निकालने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NH विभाग) ने मलबा हटाने का कार्य शुरू कर दिया है।
गहरे घाव दे रही है यह आपदा
सांसद बलूनी ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने के बाद कहा कि इस वर्ष की भीषण अतिवृष्टि और भूस्खलन ने उत्तराखंड को गहरे जख्म दिए हैं, जिन्हें भरने में लंबा समय लगेगा। कल शाम का भयावह भूस्खलन दृश्य स्पष्ट करता है कि उत्तराखंड किस विकराल प्राकृतिक आपदा से गुजर रहा है। उन्होंने आपदा के बाद की तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए हैं, जिनमें भूस्खलन की भयावहता साफ देखी जा सकती है।

बाबा केदारनाथ से की प्रार्थना
सांसद बलूनी ने बाबा केदारनाथ से प्रदेशवासियों की सुरक्षा, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की प्रार्थना की। उन्होंने इस कठिन घड़ी में राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे प्रशासनिक अधिकारियों, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवानों, तथा सड़कों से मलबा हटाने वाले कर्मचारियों के सेवाभाव की सराहना की।
उन्होंने कहा कि आपदा की इस घड़ी में जन-जन की सेवा में लगे सभी कर्मियों को मेरा नमन है। उनके अथक प्रयासों से ही कई जिंदगियां सुरक्षित हैं।
आपदा प्रबंधन पर भी उठे सवाल
उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन से कई सड़कें बंद हैं, गांवों का संपर्क टूट चुका है और हजारों लोग प्रभावित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, अनियंत्रित विकास और वनों की कटाई जैसी वजहों से ऐसी आपदाएं अब और भी तीव्र हो रही हैं।
सांसद बलूनी ने संकेत दिए कि वे केंद्र सरकार से उत्तराखंड के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग करेंगे और आपदा प्रबंधन की दीर्घकालिक रणनीति पर बल देंगे।
उत्तराखंड एक बार फिर प्रकृति के कहर का शिकार बना है। हालांकि इस हादसे में कोई जानहानि नहीं हुई, लेकिन यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि पर्वतीय राज्यों में बुनियादी संरचना को और अधिक सुदृढ़ व सुरक्षित बनाए जाने की आवश्यकता है।

