118वें कृषि कुंभ किसान मेले एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का भव्य शुभारंभ
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने 118वें कृषि कुंभ किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का फीता काटकर और दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर छह पुस्तकों का विमोचन किया गया तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रगतिशील कृषकों को सम्मानित किया गया।
राज्यपाल ने उपस्थित किसानों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय आधुनिक भारत की हरित क्रांति की जन्मस्थली है और यहां अन्नदाताओं के बीच उपस्थित होकर उन्हें गर्व का अनुभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि ‘आप सब सच्चे अर्थों में राष्ट्र की जीवनदायिनी शक्ति के प्रतिनिधि हैं, जो भारत को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाते हैं।’
कृषि अनुसंधान को नई दिशा देंगे नवाचार
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय में सेमीकंडक्टर लैब और नव-निर्मित ऑडिटोरियम का उद्घाटन एक ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये दोनों परियोजनाएं भविष्य में कृषि अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी संवाद को नई दिशा प्रदान करेंगी।
उन्होंने सम्मानित किसानों को बधाई देते हुए कहा कि इन कृषकों ने अपने परिश्रम और दूरदर्शिता से यह सिद्ध किया है कि सीमित संसाधनों में भी असाधारण उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

भारतीय संस्कृति में किसान का स्थान सर्वोपरि
राज्यपाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में किसान को सृष्टि का पोषक माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है — ‘अन्नं बहु कुर्वीत तद् व्रतम्’ — अर्थात अधिक से अधिक अन्न उत्पन्न करना मनुष्य का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि यह केवल उत्पादन नहीं, बल्कि समाज को पोषित करने का सामाजिक दायित्व है।
उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता कृषि के इर्द-गिर्द विकसित हुई है — चाहे दीपावली हो, बैसाखी, हरेला या होली, हर पर्व में धरती माता और अन्नदाता के प्रति कृतज्ञता की भावना निहित है।
जैविक और प्राकृतिक खेती का आदर्श मॉडल
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक और जलवायु विशेषताएं इसे जैविक व प्राकृतिक खेती के लिए आदर्श बनाती हैं। उन्होंने किसानों और वैज्ञानिकों से अपील की कि प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन का रूप दें।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के मार्गदर्शन में राज्यभर में प्राकृतिक खेती के सफल प्रयोग हो रहे हैं और यह ‘केमिकल-फ्री’ भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
राज्यपाल ने जानकारी दी कि विश्वविद्यालय को तीन बार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का सरदार पटेल उत्कृष्ट कृषि संस्थान पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। अब तक यहां से 44 हजार से अधिक विद्यार्थी डिग्री प्राप्त कर चुके हैं, जिनमें लगभग 50 प्रतिशत छात्राएं हैं।
तकनीक और नवाचार से सशक्त होगा किसान
राज्यपाल ने कहा कि जब तकनीक खेत तक पहुंचती है, तो किसान का जीवन सरल होता है और उत्पादकता बढ़ती है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट कृषि उपकरण, सेंसर-आधारित सिंचाई प्रणाली और ड्रोन जैसी तकनीकें किसानों की मेहनत को कम करते हुए उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि कर रही हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई योजनाओं — प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, परंपरागत कृषि विकास योजना, फसल बीमा योजना, डिजिटल कृषि मिशन और राष्ट्रीय जैविक मिशन, को कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम बताया।
‘ड्रोन दीदी योजना’ — तकनीक और नारीशक्ति का संगम
राज्यपाल ने कहा कि ‘ड्रोन दीदी योजना’ महिला सशक्तीकरण का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसके तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह पहल कृषि में तकनीकी क्रांति और ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि भारत आज न केवल खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर है, बल्कि कृषि निर्यात में भी नई पहचान बना रहा है। भारत अब विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कृषि उत्पादक देश बन चुका है।

‘श्री अन्न’, शहद और सगंध खेती — आत्मनिर्भर किसान की राह
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड के कृषि उद्योग के विकास के तीन प्रमुख स्तंभ, श्री अन्न की खेती, शहद उत्पादन, और सगंध पौधों की खेती हैं। उन्होंने कहा कि श्री अन्न (बाजरा, मडुआ, झंगोरा, कौणी, रामदाना आदि) उत्तराखण्ड की अमूल्य धरोहर हैं, जिनमें पोषण, परंपरा और पर्यावरणीय संतुलन तीनों निहित हैं।
राज्यपाल ने किसानों से कहा कि वे आधुनिक तकनीक अपनाएं, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें और मेले से प्राप्त ज्ञान को अपने खेतों में प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि किसानों का परिश्रम, विज्ञान की शक्ति और सरकार की योजनाओं का संगम ही ‘समृद्ध किसान – समृद्ध उत्तराखण्ड’ और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को साकार करेगा।
कृषि मंत्री व सांसद ने दी बधाई
कार्यक्रम में कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी और सांसद अजय भट्ट ने भी किसानों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज 89 देशों को खाद्यान्न निर्यात कर रहा है।
उन्होंने कहा कि जब अन्नदाता सशक्त होगा, तभी राष्ट्र मजबूत होगा। दोनों नेताओं ने किसानों, वैज्ञानिकों और अधिकारियों से मिलकर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का आह्वान किया और ‘वोकल फॉर लोकल’ तथा ‘मिलेट मिशन’ को बढ़ावा देने की अपील की।
503 स्टॉलों में तकनीकी नवाचारों का प्रदर्शन
कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने विश्वविद्यालय की गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस बार मेले में 503 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें कृषि उपकरण, बीज, जैविक उत्पाद, ड्रोन तकनीक और कृषि उद्योग से जुड़े नवीनतम नवाचार प्रदर्शित किए गए हैं।
कार्यक्रम में प्रो. नवीन चंद्र लोहनी, पद्मश्री माधुरी बथवाल, डीएम नितिन सिंह भदौरिया, एसएसपी मणिकांत मिश्रा, एडीएम कौस्तुभ मिश्रा, एसपी सिटी डॉ. उत्तम सिंह नेगी, एसीएमओ डॉ. के.के. अग्रवाल, डॉ. जितेंद्र क्वात्रा, ए.एस. नैन, सुभाष चंद्र, तथा बड़ी संख्या में किसान, वैज्ञानिक, विद्यार्थी और अधिकारी उपस्थित रहे।

