पंतनगर में युवा वैज्ञानिकों का जमावड़ा, अन्वेषण–2025 सम्मेलन का शुभारम्भ
पंतनगर विश्वविद्यालय में भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) और पंतनगर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में प्रतिष्ठित एआईयू अन्वेषण–उत्तर जोन छात्र अनुसंधान सम्मेलन 2025 का भव्य शुभारम्भ हुआ। इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक आयोजन की मेजबानी करना पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि है।
उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) डी.एस. रावत, पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति एवं नॉर्थ जोन अन्वेषण के संरक्षक प्रोफेसर (डॉ.) मनमोहन सिंह चौहान, एआईयू के संयुक्त निदेशक एवं नॉर्थ जोन अन्वेषण के संयोजक डॉ. अमरेंद्र पाणि, विश्वविद्यालय कुलसचिव एवं जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ. दीपा विनय, अधिष्ठाता कृषि व्यवसाय प्रबंधन एवं जोनल सह-समन्वयक डॉ. आर.एस. जादौन, निर्णायक मंडल, अधिष्ठातागण, निदेशकगण, विभिन्न समन्वयक, समितियों के अध्यक्ष/सदस्य, विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य, विद्यार्थी तथा देशभर के विभिन्न संस्थानों से आए छात्र प्रतिभागियों ने भाग लिया।
मुख्य अतिथि प्रोफेसर डी.एस. रावत ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए शोध में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए लगन, समर्पण, जिज्ञासा, रचनात्मकता और विश्लेषणात्मक सोच के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इन्हीं गुणों के आधार पर भारत वैश्विक शोध एवं नवाचार में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करेगा।

कुलपति का प्रेरक उद्बोधन
कुलपति प्रोफेसर मनमोहन सिंह चौहान ने कहा कि अन्वेषण–2025 केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि युवाओं में वैज्ञानिक भावना और नवाचार जागृत करने का उत्सव है। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच देश की शोध प्रणाली को सुदृढ़ बनाते हैं और युवा प्रतिभाओं को कृषि, सामाजिक तथा तकनीकी प्रगति के लिए नवोन्मेषी समाधान प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित करते हैं।
अपने शोध अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि किसी भी शोध की शुरुआत स्पष्ट उद्देश्यों, जुनून और निरंतर समर्पण के साथ होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के युवा वैज्ञानिकों में ऐसी क्षमता है जो देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अंत में उन्होंने विश्वविद्यालय में इस कार्यक्रम के आयोजन हेतु एआईयू का आभार व्यक्त किया।
एआईयू की भूमिका पर प्रकाश
एआईयू के संयुक्त निदेशक एवं नॉर्थ जोन संयोजक डॉ. अमरेंद्र पाणि ने एआईयू के गठन, उद्देश्य, नीतिगत निर्णयों तथा शिक्षण और शोध के क्षेत्र में उसके योगदान पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एआईयू विश्व स्तर पर कई मामलों में एक विशिष्ट संस्था है।
उन्होंने बताया कि अन्वेषण–2025 युवा शोधार्थियों को राष्ट्रीय स्तर पर अपने शोध प्रस्तुत करने, विचारों का आदान–प्रदान करने तथा राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान प्राप्त करने का अद्वितीय अवसर प्रदान करता है।

सम्मेलन की संरचना और सहभागिता
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए सह–संयोजक डॉ. आर.एस. जादौन ने अन्वेषण–2025 के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एआईयू दिशा-निर्देशों के अनुसार सम्मेलन के लिए छह प्रमुख शोध श्रेणियों — कृषि एवं संबद्ध विज्ञान, बेसिक साइंसेज़, इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य विज्ञान एवं संबद्ध क्षेत्र, अंतर्विषयक (इंटरडिसिप्लिनरी) शोध, सामाजिक विज्ञान, मानविकी, व्यवसाय प्रबंधन, वाणिज्य एवं विधि — में प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं।
उन्होंने सूचित किया कि अन्वेषण–2025 में देशभर के 250 से अधिक विश्वविद्यालय भाग ले रहे हैं। नॉर्थ जोन में 30 विश्वविद्यालयों के 1800 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है। कुल 375 छात्रों ने दो चरणों में पोस्टर प्रस्तुति और चयनित प्रविष्टियों की मौखिक (पोडियम) प्रस्तुति में अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए।
पंतनगर विश्वविद्यालय ने इस आयोजन की मेजबानी कर एक बार फिर सिद्ध किया है कि वह नवाचार, वैज्ञानिक उत्कृष्टता और राष्ट्रीय विकास को प्रोत्साहित करने वाली अग्रणी अनुसंधान–प्रधान संस्था है।
कार्यक्रम के अंत में नॉर्थ जोन संयोजक डॉ. दीपा विनय ने कुलपति प्रो. मनमोहन सिंह चौहान के कुशल नेतृत्व, एआईयू के संयुक्त निदेशक एवं संयोजक डॉ. अमरेंद्र पाणि के सहयोग, तथा समन्वयक डॉ. अभिषेक यादव, डॉ. एस.बी. सिंह, डॉ. रितिका भट्ट, डॉ. दिव्या, सभी अधिष्ठाता, विभिन्न समितियों के अध्यक्ष एवं सदस्यों तथा मीडिया प्रतिनिधियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

