एकजुट ग्रामीणों ने बदल दी तस्वीर, अपने दम पर बनाई सड़क
स्याल्दे विकासखंड के अंतर्गत ग्राम गुमटी (पोस्ट ऑफिस – मटेला) के ग्रामीणों ने वर्षों से लंबित सड़क निर्माण की मांग पूरी न होने पर एक ऐतिहासिक पहल करते हुए खुद सड़क निर्माण कार्य शुरू किया। यह कदम न केवल प्रशासनिक उपेक्षा के प्रति ग्रामीणों की नाराज़गी को दर्शाता है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की भावना को ज़मीन पर उतारने का सशक्त उदाहरण भी है।
अल्मोड़ा जिले का ग्राम गुमटी लंबे समय से सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित था। ग्रामीणों द्वारा कई बार जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों से सड़क निर्माण की मांग की गई, लेकिन हर बार आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। समय बीतने के साथ समस्याएं और गहराती गईं। बीमारों को अस्पताल ले जाना, बच्चों का स्कूल आना-जाना और दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति ग्रामीणों के लिए चुनौती बनती गई।
लगातार उपेक्षा से आहत ग्रामीणों ने सामूहिक बैठक में यह निर्णय लिया कि अब वे और इंतज़ार नहीं करेंगे। इसके बाद बिना किसी सरकारी सहायता के ग्रामीणों ने अपने श्रम, संसाधनों और आपसी सहयोग से सड़क निर्माण कार्य शुरू कर दिया। पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं और युवा भी इस कार्य में सक्रिय रूप से जुटे रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क केवल सुविधा नहीं, बल्कि जीवन की बुनियादी ज़रूरत है। उन्होंने बताया कि यह पहल किसी के विरोध में नहीं, बल्कि अपने अधिकार और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए की गई है। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि उनकी इस पहल को देखकर प्रशासन जागेगा और निर्माण कार्य को औपचारिक रूप से पूरा कराने की दिशा में ठोस कदम उठाएगा।
यह घटना शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करती है। जब ग्रामीणों को स्वयं वह कार्य करना पड़े, जो सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, तो यह व्यवस्था के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय है।
ग्राम गुमटी की यह पहल पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है। यह साबित करती है कि जब जनता संगठित होती है और संकल्प के साथ आगे बढ़ती है, तो वह कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी रास्ता बना सकती है।
इस अदम्य साहस और सामूहिक संकल्प को नमन है। अब यह आवश्यक है कि स्थानीय प्रशासन और निकाय इस संदेश को समझें और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन ईमानदारी, संवेदनशीलता और समयबद्ध तरीके से करें।

