बदरीनाथ धाम में यात्रा को लेकर हलचल, पैदल मार्ग से शौचालय तक सुधार कार्य शुरू
चारधाम यात्रा शुरू होने में बस अब कुछ ही दिन शेष बचे हुए हैं। सरकार बदरीनाथ यात्रा की तैयारियों को लेकर जुटी हुई है और जो भी काम बचे हुए हैं उन्हें समय से करने के लिए कहा गया है।
बदरीनाथ धाम में आगामी यात्रा सीजन को देखते हुए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। यात्रा शुरू होने में अब लगभग 21 दिन का समय शेष है, ऐसे में प्रशासन और स्थानीय निकाय व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुट गए हैं। इसी क्रम में नगर पंचायत बदरीनाथ ने धाम में यात्रा तैयारियों का कार्य औपचारिक रूप से शुरू कर दिया है।
नगर पंचायत बदरीनाथ की ओर से 50 सदस्यीय दल को धाम में भेजा गया है, जो विभिन्न यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने में जुटा हुआ है। यह दल पैदल मार्गों की मरम्मत, पथ प्रकाश (लाइटिंग), सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था और साफ-सफाई जैसे अहम कार्यों को प्राथमिकता दे रहा है, ताकि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि बदरीनाथ धाम यात्रा के सुचारु और सुरक्षित संचालन के लिए सभी संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्गों को दुरुस्त करने के लिए NHIDCL, BRO और लोक निर्माण विभाग (एनएच) को सड़कों के सुधार कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि आपात स्थिति में तुरंत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। अन्य विभागों को भी यात्रा शुरू होने से पहले सभी जरूरी तैयारियां पूरी करने को कहा गया है।
नगर पंचायत द्वारा भेजा गया दल धाम में पैदल रास्तों की मरम्मत के साथ-साथ फास्ट ट्रैक व्यवस्थाओं, यात्री ठहराव, सफाई व्यवस्था और प्रकाश व्यवस्था को बेहतर बनाने में जुटा है। प्रशासन का लक्ष्य है कि यात्रा शुरू होने से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह से चाक-चौबंद कर दी जाएं।
हर साल लाखों श्रद्धालु बदरीनाथ धाम के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, ऐसे में इस बार भी भारी संख्या में यात्रियों के आने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन कोई भी कमी नहीं छोड़ना चाहता और तैयारियों को समय से पहले पूरा करने पर जोर दे रहा है।
कुल मिलाकर, प्रशासन और नगर पंचायत मिलकर यह सुनिश्चित करने में लगे हैं कि आने वाली यात्रा न केवल सुगम और सुरक्षित हो, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए एक बेहतर अनुभव भी साबित हो।

