गढ़वाली फिल्म ‘कण्डली’ का पोस्टर लॉन्च, दिखा संस्कृति और सिनेमा का संगम
उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और महिलाओं के संघर्ष, शक्ति एवं सशक्तिकरण को समर्पित गढ़वाली फिल्म ‘कण्डली’ के पोस्टर का विमोचन 9 अप्रैल 2026 को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, नई दिल्ली में किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में एनएसएबी के अध्यक्ष एवं पूर्व रॉ और एनटीआरओ के चेयरमैन आलोक जोशी उपस्थित रहे। इसके अलावा, मशहूर लेखिका एवं स्तंभकार अद्वैता काला, फिल्म के लेखक एवं निर्देशक शिव नारायण सिंह रावत, निर्माता एयर वाइस मार्शल (सेवानिवृत्त) राजेश भंडारी एवं वीरेंद्र सिंह पटवाल, तथा आज तक के कार्यकारी संपादक मनजीत नेगी मंचासीन रहे। इस अवसर पर फिल्म से जुड़े कलाकारों सहित अनेक गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे।

महिला सशक्तिकरण का सशक्त संदेश
मुख्य अतिथि आलोक जोशी ने कहा कि वह आमतौर पर सुरक्षा मुद्दों पर ही बोलते हैं। उन्होंने बताया कि जब उन्हें राजेश जी का फोन आया और उन्होंने कहा कि वे एक गढ़वाली फिल्म बना रहे हैं, जिसका पोस्टर लॉन्च करना है, तो उन्हें यह जानकर आश्चर्य हुआ। सबसे खास बात यह रही कि एयर वाइस मार्शल राजेश भंडारी जी, जो एयर फोर्स में रहे हैं, एक पुलिस अधिकारी पर फिल्म बना रहे हैं। यह उनके लिए एक दिलचस्प और सराहनीय पहल है। उन्होंने इस फिल्म के लिए पूरी टीम को बधाई दी और आशा जताई कि यह फिल्म सफल होगी। मजाकिया लहजे में उन्होंने यह भी कहा कि, ‘मैं कोई धुरंधर नहीं हूं।’
इस अवसर पर फिल्म के निर्माता एयर वाइस मार्शल राजेश भंडारी ने कहा कि कुछ कहानियां सिर्फ देखी नहीं जाती, उन्हें महसूस किया जाता है और वह रूह में उतर जाती हैं। आज हम एक ऐसी ही कहानी लेकर आए हैं, जो उत्तराखंड की मिट्टी से जन्मी है और हर दिल में एक आग जला देगी। यह संघर्ष, संस्कृति और अदम्य साहस की गूंज है, उस मिट्टी की, जहां हर पत्थर बोलता है, हर हवा एक दास्तान सुनाती है और अब, उसी दास्तान को सिनेमा के पर्दे पर उतारने का समय आ गया है। यह सिर्फ एक फिल्म नहीं है, यह एक गर्जना है, एक एहसास है, जो आपके रोंगटे खड़े कर देगा। तैयार हो जाइए एक ऐसे अनुभव के लिए, जो आपको अंदर तक हिला देगा। क्योंकि अब समय आ गया है ‘कंडाली’ को जीने का।

फिल्म के लेखक एवं निर्देशक शिव नारायण सिंह रावत ने कहा कि फिल्म का शीर्षक ‘कण्डली’ (एक औषधीय और पौष्टिक पौधा) स्वयं में प्रतीकात्मक है, जो कठिन परिस्थितियों में भी उपयोगी और सशक्त बने रहने का संदेश देता है। यह फिल्म उत्तराखंड की महिलाओं की उसी ताकत और सहनशीलता को दर्शाने का प्रयास है। इस अवसर पर सभी वक्ताओं ने अपनी अपनी बात रखी और फिल्म की सफलता के लिए पूरी टीम को शुभकामनाएं दी।
फिल्म ‘कण्डली’ केवल एक मनोरंजन माध्यम नहीं, बल्कि एक मजबूत सामाजिक संदेश देने का प्रयास है। यह फिल्म उत्तराखंड के लोकजीवन और सामाजिक वास्तविकताओं को दर्शाते हुए उन साहसी महिलाओं और बालिकाओं की कहानी प्रस्तुत करती है, जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए निरंतर संघर्ष करती हैं।
फिल्म में यह दर्शाया गया है कि आत्मविश्वास, शिक्षा और दृढ़ संकल्प के बल पर महिलाएं न केवल अपने जीवन को बदल सकती हैं, बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं। साथ ही, इसमें उत्तराखंड की पारंपरिक वेशभूषा, संस्कृति, रीति-रिवाज और प्राकृतिक सौंदर्य को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा।

अनुभवी टीम के साथ नई पहल
इस फिल्म के लेखक एवं निर्देशक शिव नारायण सिंह रावत हैं, जबकि निर्माता एयर वाइस मार्शल राजेश भंडारी (सेवानिवृत्त) और वीरेंद्र सिंह पटवाल हैं। फिल्म का शुभारंभ पूरी स्टार कास्ट की उपस्थिति में किया गया। शिव नारायण सिंह रावत को फिल्म निर्माण के क्षेत्र में चार दशकों से अधिक का अनुभव है।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1983-84 में गढ़वाली फिल्म ‘जगवाल’ से की थी। इसके बाद उन्होंने हिंदी फिल्म ‘राजू बजरंगी’ (2015) और हाल ही में चर्चित गढ़वाली फिल्म ‘बौल्या काका’ का निर्देशन किया, जिसे दर्शकों से काफी सराहना मिली।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
फिल्म ‘कण्डली’ की कहानी एक ग्रामीण परिवेश की लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है, जो संघर्षों का सामना करते हुए आगे बढ़ती है और अंततः एक आईपीएस अधिकारी बनती है। कहानी में कानून व्यवस्था, सामाजिक बुराइयों से संघर्ष, पर्यावरण संरक्षण तथा महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों को प्रमुखता से उठाया गया है।

फिल्म में यह भी दिखाया जाएगा कि कैसे नायिका अवैध गतिविधियों, जंगलों की कटाई और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ मजबूती से खड़ी होती है और समाज में बदलाव लाने का प्रयास करती है।
जल्द शुरू होगी फिल्म की शूटिंग
फिल्म की शूटिंग अगले महीने उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र के रमणीय स्थलों में शुरू की जाएगी। निर्माताओं के अनुसार, यह फिल्म कुछ ही महीनों के भीतर उत्तराखंड, दिल्ली और एनसीआर के सिनेमाघरों में रिलीज के लिए तैयार होगी।
यह फिल्म न केवल उत्तराखंड बल्कि देशभर में बसे उत्तराखंडी समुदाय के दर्शकों को जोड़ने का कार्य करेगी और उनके सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत बनाएगी।
इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों के समाजसेवी, कला प्रेमी और उत्तराखंड की संस्कृति में रुचि रखने वाले लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे क्षेत्रीय सिनेमा और सामाजिक जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

