उत्तराखंड में 9 जिलों में लगेंगे एडब्लूएस और 3 जिलों में डाप्लर राडार
आपदा जोखिम को कम करने और समय पर सटीक चेतावनी तंत्र विकसित करने के उद्देश्य से राज्य में अर्ली वार्निंग सिस्टम को सशक्त बनाने पर सरकार विशेष जोर दे रही है।
इस कड़ी में नौ जिलों में आटोमैटेड वेदर स्टेशन (एडब्ल्यूएस) और तीन जिलों में डाप्लर राडार लगाए जाएंगे। इससे मौसम और संभावित आपदा की पहले ही जानकारी मिल सकेगी, जो आपदा जोखिम न्यूनीकरण में मददगार होगी।
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार रक्षा भू-स्थानिक अनुसंधान प्रतिष्ठान (डीजीआरई) के सहयोग से उत्तरकाशी व टिहरी जिले में आठ-आठ, पौड़ी में सात, देहरादून में पांच, रुद्रप्रयाग व बागेश्वर में तीन-तीन, अल्मोड़ा में दो और नैनीताल व हरिद्वार जिले में एक-एक एडब्ल्यूएस स्थापित किए जाएंगे।
इसके अलावा मौसम विभाग द्वारा देहरादून, अल्मोड़ा, चंपावत और चमोली जिलों में से किन्हीं तीन में डाप्लर राडार लगाए जाएंगे। संबंधित जिलों को इसके लिए भूमि चयनित कर प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि एडब्लूएस से जहां मौसम से जुड़ी सटीक व त्वरित जानकारी प्राप्त होगी, वहीं डाप्लर राडार से वर्षा, बादल और मौसम की गतिविधियों पर रियल टाइम निगरानी संभव होगी।
इस बीच आपदा प्रबंधन सचिव ने शनिवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में हुई बैठक में सभी जिलों के आपदा प्रबंधन से जुड़े विषयों की समीक्षा की।
उन्होंने केंद्र के एनडीएमआईएस पोर्टल पर आपदा मद में हुए खर्च का पूरा विवरण शीघ्र अपलोड करने के निर्देश दिए।
बैठक में आपदाओं के दौरान लापता व्यक्तियों को मृत घोषित करने से जुड़े मामलों की समीक्षा के दौरान सचिव सुमन ने कहा कि जिन मामलों में कार्यवाही लंबित है, उनके प्रस्ताव जल्द शासन को भेजे जाएं।

