गणतंत्र दिवस 2026 से पहले भारतीय सेना के जांबाज़ों को वीरता और विशिष्ट सेवा सम्मान

गणतंत्र दिवस 2026 से पहले भारतीय सेना के जांबाज़ों को वीरता और विशिष्ट सेवा सम्मान

गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति ने भारतीय सेना के अधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों तथा जवानों को उनकी असाधारण वीरता, उत्कृष्ट नेतृत्व और विशिष्ट सेवा के लिए अनेक प्रतिष्ठित अलंकरण प्रदान करने की स्वीकृति दी है। ये सम्मान विभिन्न सैन्य अभियानों के दौरान प्रदर्शित अदम्य साहस, पेशेवर उत्कृष्टता और राष्ट्र के प्रति निष्ठा के लिए प्रदान किए गए हैं।

वीरता पुरस्कार

चक्र श्रेणी के अंतर्गत 2 कीर्ति चक्र और 10 शौर्य चक्र प्रदान किए गए हैं, जिनमें 1 शौर्य चक्र मरणोपरांत शामिल है।

इसके अतिरिक्त, सेना मेडल (वीरता) पर 1 बार तथा 44 सेना मेडल (वीरता) प्रदान किए गए हैं, जिनमें 5 मरणोपरांत हैं।

विशिष्ट सेवा पुरस्कार

राष्ट्रपति ने 19 परम विशिष्ट सेवा मेडल, 4 उत्तम युद्ध सेवा मेडल, 35 अति विशिष्ट सेवा मेडल और 7 युद्ध सेवा मेडल प्रदान करने की भी स्वीकृति दी है।

इसके अलावा, सेना मेडल (विशिष्ट) पर 2 बार, 43 सेना मेडल (विशिष्ट) तथा 85 विशिष्ट सेवा मेडल प्रदान किए गए हैं।

साथ ही, ऑपरेशन रक्षक, ऑपरेशन स्नो लेपर्ड, ऑपरेशन हिफ़ाज़त, ऑपरेशन ऑर्किड, ऑपरेशन मेघदूत सहित विभिन्न सैन्य अभियानों, बचाव कार्यों एवं हताहत निकासी अभियानों में उत्कृष्ट योगदान के लिए 81 ‘मेंशन-इन-डिस्पैच’ भी प्रदान किए गए हैं।

चक्र पुरस्कार प्राप्त करने वालों की संक्षिप्त उपलब्धियाँ

कीर्ति चक्र

मेजर अरशदीप सिंह (1 असम राइफल्स)
14 मई 2025 को भारत–म्यांमार सीमा पर विशेष गश्ती दल का नेतृत्व करते हुए उन्होंने घने जंगलों में ऊँचाई पर स्थित दुश्मन ठिकाने पर साहसिक आक्रमण किया। भीषण गोलीबारी के बावजूद उन्होंने कई सशस्त्र उग्रवादियों को निष्क्रिय किया और अपनी टुकड़ी को सुरक्षित निकाला।

नायब सूबेदार दोलेश्वर सुब्बा (पैरा स्पेशल फोर्सेस)
11 अप्रैल 2025 को किश्तवाड़ के जंगलों में आतंकवाद-रोधी अभियान के दौरान उन्होंने भारी गोलीबारी के बीच आगे बढ़ते हुए एक विदेशी आतंकवादी को निकट दूरी से मार गिराया तथा दूसरे को भी निष्क्रिय किया। उनका साहस और धैर्य अनुकरणीय रहा।

शौर्य चक्र

लेफ्टिनेंट कर्नल घटगे आदित्य श्रीकुमार (पैरा स्पेशल फोर्सेस)
11 से 13 जुलाई 2025 के बीच भारत–म्यांमार सीमा पर एक सटीक अभियान की योजना बनाकर स्वयं नेतृत्व किया, जिसके परिणामस्वरूप एक मजबूत उग्रवादी शिविर नष्ट हुआ और 9 आतंकवादी मारे गए।

मेजर अंशुल बलटू (32 असम राइफल्स)
29 अप्रैल 2025 को असम के दीमा हसाओ जिले में मुठभेड़ के दौरान व्यक्तिगत साहस का प्रदर्शन करते हुए एक उग्रवादी को मार गिराया, जिससे कुल तीन आतंकवादी निष्क्रिय किए गए।

मेजर शिवकांत यादव (पैरा स्पेशल फोर्सेस)
12–13 मई 2025 की रात शोपियां में कठिन परिस्थितियों में आतंकवादियों का पीछा करते हुए एक अत्यंत खतरनाक आतंकवादी को निकट मुकाबले में मार गिराया।

मेजर विवेक (42 राष्ट्रीय राइफल्स)
15 मई 2025 को पुलवामा में तलाशी अभियान के दौरान नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एक ‘ए+’ श्रेणी के आतंकवादी को निष्क्रिय किया।

मेजर लैशांगथेम दीपक सिंह (पैरा स्पेशल फोर्सेस)
अपहृत नागरिकों को मुक्त कराने के उच्च जोखिम वाले अभियान में असाधारण साहस का परिचय देते हुए आतंकवादियों को निकट से निष्क्रिय किया और एक निर्दोष नागरिक को सुरक्षित बचाया।

कैप्टन योगेंद्र सिंह ठाकुर (पैरा स्पेशल फोर्सेस)
21 जुलाई 2025 को उधमपुर के बसंतगढ़ क्षेत्र में घात लगाकर किए गए अभियान में एक कुख्यात जैश-ए-मोहम्मद आतंकवादी को मार गिराया।

सूबेदार पी. एच. मोसेस (1 असम राइफल्स)
14 मई 2025 को भीषण गोलीबारी के बीच रेंगते हुए बेहतर मोर्चा संभाला और कई आतंकवादियों को निष्क्रिय किया।

लांस दफादार बलदेव चंद (42 राष्ट्रीय राइफल्स) – मरणोपरांत
19 सितंबर 2025 को किश्तवाड़ में आतंकवादियों से आमने-सामने की लड़ाई में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अंत तक संघर्ष करते रहे और सर्वोच्च बलिदान दिया।

राइफलमैन मंगलेम सांग वैफेई (3 असम राइफल्स)
9 जून 2025 को मणिपुर में घुसपैठ-रोधी अभियान के दौरान तीन सशस्त्र उग्रवादियों को मार गिराकर अपनी टुकड़ी की सुरक्षा सुनिश्चित की।

राइफलमैन धुर्बा ज्योति दत्ता (33 असम राइफल्स)
19 सितंबर 2025 को बाढ़ राहत कार्य से लौटते समय हुए हमले में घायल होने के बावजूद वाहन को सुरक्षित स्थान तक ले जाकर आठ साथियों की जान बचाई।

Yogi Varta

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