एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय का 12वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न, 79 स्वर्ण पदक विजेताओं समेत 177 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि

एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय का 12वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न, 79 स्वर्ण पदक विजेताओं समेत 177 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि

श्रीनगर में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय का 12वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को धूमधाम से सम्पन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. योगेन्द्र नारायण ने की, जबकि उत्तराखंड के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

दीक्षांत समारोह के अवसर पर कुल 105 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जिनमें 50 विद्यार्थी सत्र 2022-24 तथा 55 छात्र-छात्राएं सत्र 2023-25 के शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 177 पंजीकृत शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। वहीं, दोनों सत्रों में कुल 319 शोधार्थियों ने पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। इसके अलावा 6806 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर उपाधियां प्रदान की गईं।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि विश्वविद्यालय वर्तमान कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह के नेतृत्व में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है, जिसका प्रमाण इसकी नैक ग्रेडिंग है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान और मजबूत करने के लिए और अधिक ऊर्जा के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि उत्तराखंड सरकार विश्वविद्यालय के विकास के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि दीक्षांत समारोह में पारंपरिक एवं सांस्कृतिक वेशभूषा को अपनाना एक सराहनीय पहल है, जिससे छात्रों में अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति रुचि बढ़ेगी। साथ ही उन्होंने बताया कि अप्रैल माह में देश के उच्च शिक्षा मंत्री के साथ एनआईटी और गढ़वाल विश्वविद्यालय में कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियों एवं भावी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि एक नए जीवन की शुरुआत है। डिग्री केवल कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की वास्तविक शक्ति होती है।

उन्होंने दीक्षार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में ऐसा कार्य करें जिससे उनके माता-पिता, गुरु, विश्वविद्यालय और देश को उन पर गर्व हो। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र को सर्वोपरि रखते हुए कार्य करने का संदेश दिया।

इस अवसर पर डॉ. विश्वेश वाग्मी ने मुख्य अतिथि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का संदेश पढ़कर सुनाया, जिसमें उन्होंने दीक्षार्थियों से भारत की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाने और अपने ज्ञान व कौशल का उपयोग समाज एवं राष्ट्रहित में करने का आह्वान किया।

अध्यक्षीय संबोधन में कुलाधिपति डॉ. योगेन्द्र नारायण ने कहा कि विद्यार्थियों को अतीत के ज्ञान से प्रेरणा लेते हुए वर्तमान के वैज्ञानिक एवं पारंपरिक ज्ञान के समन्वय से नवाचार और विकास की दिशा में कार्य करना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण एवं अभियांत्रिकी विभाग की शोध पत्रिका ‘माउंटेन रिसर्च’ के विशेषांक का विमोचन भी किया गया। अंत में कुलसचिव अनीश उज्जमां ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और समारोह के सफल आयोजन के लिए समन्वयक प्रो. हरभजन सिंह चौहान एवं सभी समितियों को बधाई दी।

इस अवसर पर श्रीनगर की महापौर श्रीमती आरती भंडारी, एसएसबी के डीआईजी सुभाष चंद्र नेगी, प्रो. रामशंकर दुबे (पूर्व कुलपति, गुजरात विश्वविद्यालय), प्रो. मंजुला राणा, प्रो. मोहन पंवार, प्रो. एन.एस. पंवार, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. ओ.पी. गुसाईं, मुख्य नियंता प्रो. दीपक कुमार सहित अनेक गणमान्य अतिथि, संकाय सदस्य, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

Yogi Varta

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