केदारनाथ यात्रा से पहले घोड़े-खच्चरों की होगी सख्त जांच, बिना बीमा नहीं मिलेगा लाइसेंस
केदारनाथ मंदिर की पवित्र यात्रा को लेकर इस वर्ष प्रशासन ने तैयारियों को समय से पहले गति दे दी है। 22 अप्रैल से धाम के कपाट खुलने हैं, उससे पहले ही पशुपालन विभाग और जिला प्रशासन ने घोड़ा-खच्चर संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं को सख्त और व्यवस्थित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।
26 फरवरी से पंजीकरण की प्रक्रिया पहले चरण में छह निर्धारित स्थानों पर शुरू कर दी गई है। यहां घोड़ा-खच्चर संचालकों को रोस्टर के अनुसार बुलाया जा रहा है, ताकि भीड़भाड़ न हो और प्रत्येक पशु की ठीक से जांच की जा सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि होली के बाद दूसरे चरण का रोस्टर जारी किया जाएगा, जिसमें शेष संचालकों को शामिल किया जाएगा।
स्वास्थ्य परीक्षण और माइक्रो चिपिंग अनिवार्य
इस बार यात्रा मार्ग पर सवारी और सामान ढोने वाले सभी घोड़ा-खच्चरों के लिए व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य कर दिया गया है। बिना मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र किसी भी पशु को संचालन की अनुमति नहीं मिलेगी।
पशुओं की माइक्रो चिपिंग (पहचान सुनिश्चित करने के लिए), टीकाकरण, रक्त सैंपलिंग, पशु बीमा, इन सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाएगा।

रांजाक क्षेत्र में अब तक लगभग 300 घोड़ा-खच्चरों की जांच कर उनमें माइक्रो चिप लगाई जा चुकी है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह डिजिटल पहचान भविष्य में निगरानी और पारदर्शिता बनाए रखने में सहायक होगी।
हालांकि बीमा शुल्क में बढ़ोतरी के कारण संचालकों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि बढ़ी हुई लागत से उनकी आय प्रभावित होगी। लेकिन प्रशासन ने दो टूक कहा है कि बिना बीमा और मेडिकल प्रमाणपत्र के पंजीकरण नहीं होगा। अधिकारियों का तर्क है कि यह कदम पशुओं और यात्रियों दोनों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
पांच हजार पशुओं को संचालन की तैयारी
जिला प्रशासन करीब पांच हजार घोड़ा-खच्चरों को संचालन की अनुमति देने की तैयारी में है। इसके लिए डिजिटल डाटा बेस तैयार किया जा रहा है, जिसमें प्रत्येक पशु की स्वास्थ्य रिपोर्ट, बीमा स्थिति और पहचान संबंधी विवरण दर्ज होगा। इससे किसी भी अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई संभव हो सकेगी।
यात्रा मार्ग पर पशुओं के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। तय मानकों से अधिक भार ढोने पर जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए विशेष टीमें तैनात रहेंगी, जो यात्रा अवधि के दौरान लगातार निगरानी करेंगी।
यात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने का प्रयास
प्रशासन का कहना है कि इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य यात्रा को अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है। साथ ही पशु कल्याण के मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
केदारनाथ धाम की यात्रा में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, ऐसे में घोड़ा-खच्चरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस बार सख्त नियमों और तकनीकी निगरानी के साथ प्रशासन ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि आस्था के साथ-साथ सुरक्षा और पशु कल्याण भी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

