बद्रीनाथ धाम में नवनिर्मित भव्य प्रवेश द्वार का लोकार्पण: श्रद्धा, सेवा और सैन्य-नागरिक सहयोग का अद्वितीय संगम
बद्रीनाथ धाम—हिमालय की गोद में बसे इस पवित्र तीर्थ में सोमवार का दिन विशेष बन गया, जब श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों और सैन्य अधिकारियों की उपस्थिति में नवनिर्मित एवं भव्य प्रवेश द्वार का लोकार्पण विधिवत् सम्पन्न हुआ। यह दिव्य प्रवेश द्वार नये पुल के समीप स्थापित किया गया है, जो अब तीर्थयात्रियों का स्वागत एक नए गौरव और आध्यात्मिक गरिमा के साथ करेगा।
इस गरिमामय अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल डी. एस. राणा, पीवीएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम, एसएम, पीएचडी, कर्नल ऑफ द गढ़वाल राइफल्स एवं गढ़वाल स्काउट्स ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर प्रवेश द्वार का उद्घाटन किया। उद्घाटन के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, स्थानीय परंपराओं और पर्वतीय संस्कृति की झलक ने पूरे वातावरण को पावन बना दिया।
कार्यक्रम में गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर, लैंसडौन के सेंटर कमांडेंट ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी विशेष रूप से मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति से न केवल कार्यक्रम की शोभा बढ़ी बल्कि सैन्य-नागरिक एकता का संदेश भी स्पष्ट रूप से प्रतिध्वनित हुआ।

गढ़वाल राइफल्स का भेंटस्वरूप योगदान
यह प्रवेश द्वार गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर, लैंसडौन द्वारा बद्रीनाथ मंदिर को भेंटस्वरूप प्रदान किया गया है। पहाड़ी संस्कृति, उत्तराखंड के गौरव और सैन्य बलों की सेवा भावना का यह उत्कृष्ट प्रतीक स्थानीय समुदाय को अत्यंत भावुक और गौरवान्वित करता है।
गढ़वाल राइफल्स ने न केवल धाम की पारंपरिक सुंदरता में वृद्धि की है, बल्कि यह भी दर्शाया है कि सेना केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है — वह समाज, संस्कृति और स्थानीय धरोहर के संरक्षण में भी समान रूप से समर्पित है।
स्थानीय प्रशासन की सराहनीय भूमिका
उद्घाटन समारोह को सफल बनाने में स्थानीय प्रशासन, मंदिर समिति और कई सामाजिक संगठनों का उल्लेखनीय योगदान रहा। उनकी सक्रिय भागीदारी के कारण पूरा कार्यक्रम अत्यंत शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और सभी सुरक्षा मानकों के अनुरूप संपन्न हुआ। उपस्थित अधिकारियों और कर्मियों की कार्यशैली की सर्वत्र प्रशंसा की गई।

तीर्थयात्रियों के अनुभव को देगा नई ऊंचाइयां
नवनिर्मित प्रवेश द्वार ने बद्रीनाथ मंदिर परिसर की पारंपरिक गरिमा में वृद्धि की, वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक एवं सौंदर्यपूर्ण बनाया, तीर्थयात्रियों को सुव्यवस्थित, आकर्षक और दिव्य अनुभव प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इस नए द्वार से गुजरते ही यात्रियों को तीर्थ की पवित्रता और दिव्यता का प्रथम स्पर्श मिल जाएगा, जो उनकी यात्रा को भावनात्मक रूप से और भी प्रभावी बनाएगा।
सैन्य-नागरिक सहयोग का प्रेरणादायी उदाहरण
गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर का यह योगदान उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जन-समर्पण, और सैन्य-नागरिक सहयोग का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। स्थानीय समुदाय ने इस पहल को अत्यंत प्रेरणादायी बताते हुए केंद्र को हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया है।
बद्रीनाथ धाम में स्थापित यह प्रवेश द्वार आने वाले वर्षों तक न केवल तीर्थयात्रियों का स्वागत करेगा, बल्कि यह भी याद दिलाएगा कि जब समाज और सेना एक साथ विकास और संस्कृति की रक्षा के लिए खड़े होते हैं, तो परिणाम हमेशा भव्य और ऐतिहासिक होते हैं।

