केदारनाथ यात्रा मार्ग को मिली नई सौगात: भीमबली–गरुड़ चट्टी पैदल मार्ग हुआ पूर्ण

केदारनाथ यात्रा मार्ग को मिली नई सौगात: भीमबली–गरुड़ चट्टी पैदल मार्ग हुआ पूर्ण

देवभूमि उत्तराखंड में स्थित विश्वप्रसिद्ध केदारनाथ धाम की यात्रा को सुरक्षित, सुगम और पर्यावरण-संवेदनशील बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। भीमबली से गरुड़ चट्टी तक प्रस्तावित नया 5.5 किलोमीटर लंबा पैदल मार्ग अब पूर्ण रूप से बनकर तैयार हो गया है। यह मार्ग वर्ष 2019 में किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण और भू-तकनीकी अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया था।

इस मार्ग का सर्वेक्षण एवं New Road Alignment दिसंबर 2019 में किया गया था, जिसकी जानकारी हाल ही में लोक निर्माण विभाग (PWD) के सहायक अभियंता द्वारा दी गई। मार्ग के पूर्ण होने की सूचना से इस परियोजना से जुड़े वैज्ञानिक एवं अभियंता समुदाय में विशेष हर्ष का वातावरण है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तैयार मार्ग

नए पैदल मार्ग की योजना बनाते समय भू-विज्ञान, पर्यावरण संरक्षण और यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। मार्ग को अधिकतर ठोस एवं स्थिर चट्टानों पर निकाला गया है, जिससे भू-स्खलन की संभावना न्यूनतम रहे। साथ ही इसे हिमस्खलन (Avalanche Zone) क्षेत्रों से यथासंभव दूर रखा गया है।

मंदाकिनी नदी की Channel Morphology और उससे होने वाले भू-कटाव को ध्यान में रखते हुए मार्ग का निर्धारण किया गया है, ताकि भविष्य में नदी के प्रवाह से कोई क्षति न हो। पैदल मार्ग का ढाल (Gradient), मोड़ों की चौड़ाई तथा संरचना मानक इंजीनियरिंग दिशानिर्देशों के अनुरूप रखी गई है, जिससे यात्रियों को कम थकान महसूस हो।

सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता

यात्रियों की सुरक्षा के लिए बाहरी ढाल की ओर मजबूत रेलिंग लगाई गई है। यह मार्ग केवल पैदल यात्रियों के लिए निर्धारित किया गया है, जिससे भीड़ नियंत्रण और दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी।

पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के मानकों का पूर्ण पालन किया गया है। मार्ग की चौड़ाई नियंत्रित रखी गई है तथा वृक्षों की कटाई नगण्य स्तर पर की गई है।

दीर्घकालिक लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मार्ग आने वाले सैकड़ों वर्षों तक केदारनाथ धाम की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सहज और आनंददायक अनुभव प्रदान करेगा। वर्ष 2013 की भीषण आपदा के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई यह संरचना आपदा-प्रतिरोधक क्षमता को भी सुदृढ़ करती है।

यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नव केदारपुरी परियोजना के अंतर्गत की जा रही व्यापक विकास योजनाओं के अनुरूप है, जिसमें वैज्ञानिक सलाह और व्यावहारिक अनुभव का समन्वय किया गया।

श्रद्धा और सेवा का संगम

इस परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्य केवल एक संरचनात्मक उपलब्धि नहीं, बल्कि भगवान केदारनाथ की सेवा का एक माध्यम है। आशा व्यक्त की जा रही है कि यह मार्ग आने वाली पीढ़ियों तक तीर्थयात्रियों के लिए सहायक सिद्ध होगा और देवभूमि उत्तराखंड की गरिमा को और अधिक ऊँचाइयों तक ले जाएगा।

साभार — प्रोफेसर एमपीएस बिष्ट

Yogi Varta

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