पंतनगर विश्वविद्यालय में ‘ब्रेन 3.0’ का शुभारम्भ: डिजिटल कृषि और एआई आधारित अनुसंधान भविष्य की दिशा – शिवराज सिंह चौहान
गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में ‘बूस्टिंग रिसर्च, एकेडमिक्स, इनोवेशन एंड नेटवर्किंग (ब्रेन 3.0)’ विषय पर आयोजित दो-दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श कार्यशाला का भव्य शुभारम्भ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत सरकार के केंद्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की।
इस अवसर पर उत्तराखंड के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, सांसद अजय भट्ट, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिवेन्द्र कुमार कश्यप, देश-विदेश से आए पूर्व छात्र, वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, शिक्षाविद् एवं उद्योग जगत से जुड़े अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

डिजिटल कृषि और एआई से आएगी नई कृषि क्रांति
मुख्य अतिथि शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि भारत की हरित क्रांति की जन्मस्थली और कृषि आत्मनिर्भरता की मजबूत आधारशिला है। उन्होंने कहा कि अब कृषि क्षेत्र डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), बिग डेटा, प्रिसिजन फार्मिंग तथा आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों के माध्यम से नई दिशा में आगे बढ़ रहा है और इस परिवर्तन का नेतृत्व पंतनगर विश्वविद्यालय कर सकता है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
‘ब्रेन 3.0’ ज्ञान और नवाचार का राष्ट्रीय मंच : सीएम धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ब्रेन 3.0 केवल पूर्व छात्रों का सम्मेलन नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुभव, नवाचार और भविष्य की संभावनाओं को जोड़ने वाला एक राष्ट्रीय मंच है। उन्होंने पूर्व छात्रों से विश्वविद्यालय, उत्तराखंड और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में जैविक खेती, कृषि स्टार्टअप, ड्रोन तकनीक, डिजिटल कृषि तथा प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित कृषि नवाचारों की अपार संभावनाएं हैं और राज्य सरकार इन क्षेत्रों को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है।

पंतनगर विश्वविद्यालय को ‘हेरिटेज विश्वविद्यालय’ घोषित करने की मांग
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय देश की कृषि शिक्षा और अनुसंधान का गौरव है। उन्होंने केंद्र सरकार से विश्वविद्यालय को ‘हेरिटेज विश्वविद्यालय’ घोषित करने तथा इसकी ऐतिहासिक इमारतों एवं आधारभूत संरचनाओं के संरक्षण एवं विकास के लिए विशेष सहायता प्रदान करने का आग्रह किया।
राष्ट्रीय डेटा सेंटर और एआई इन एग्रीकल्चर सेंटर की परिकल्पना
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने स्वागत भाषण में कहा कि ब्रेन 3.0 विश्वविद्यालय के लिए ऐतिहासिक अवसर है, जहां देश-विदेश के पूर्व छात्र अपनी विशेषज्ञता और अनुभव साझा कर भारतीय कृषि के भविष्य की नई दिशा तय करेंगे।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय कृषि डेटा सेंटर तथा एआई इन एग्रीकल्चर सेंटर स्थापित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है, जो देश के सभी कृषि विश्वविद्यालयों के लिए महत्वपूर्ण संसाधन सिद्ध होगा।
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक हुए सम्मानित
इस अवसर पर कुलपति प्रो. शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, कृषि मंत्री गणेश जोशी तथा सांसद अजय भट्ट को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री ने कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए विश्वविद्यालय के पूर्व अधिष्ठाता (कृषि) एवं असम कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. ए.एन. मुखोपाध्याय को सम्मानित किया।

वृक्षारोपण, संग्रहालय भ्रमण और कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन
कार्यक्रम की शुरुआत तराई भवन परिसर में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा वृक्षारोपण से हुई। इसके बाद अतिथियों ने पंडित गोविन्द बल्लभ पंत की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
अतिथियों ने विश्वविद्यालय संग्रहालय एवं प्रदर्शनी का अवलोकन किया, व्यावहारिक फसल उत्पादन प्रक्षेत्र का भ्रमण किया तथा विद्यार्थियों से संवाद कर उनके नवाचारों और शोध कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने गांधी हॉल में आयोजित आम प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।
कृषि के भविष्य पर होगा राष्ट्रीय मंथन
दो-दिवसीय कार्यशाला के दौरान कृषि अनुसंधान, उच्च शिक्षा, नवाचार, उद्योग-शिक्षा सहयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल कृषि, जलवायु परिवर्तन, कृषि स्टार्टअप, डेटा विज्ञान तथा कृषि क्षेत्र की उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ विचार-विमर्श करेंगे।
कार्यशाला में देश-विदेश से आए पूर्व छात्र, वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, उद्योग विशेषज्ञ और नीति-निर्माता विकसित कृषि एवं विकसित भारत के निर्माण के लिए अपने अनुभव और सुझाव साझा करेंगे।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी अधिष्ठाता, निदेशक, विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य, अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं भी उपस्थित रहे।

