कृषि, पोषण और उद्यमिता में श्रीअन्न की भूमिका पर एक दिवसीय संगोष्ठी

कृषि, पोषण और उद्यमिता में श्रीअन्न की भूमिका पर एक दिवसीय संगोष्ठी

गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में चल रहे तीन-दिवसीय ‘श्रीअन्न उत्सव’ के अंतिम दिन श्रीअन्न से निर्मित विभिन्न खाद्य उत्पादों/व्यंजनों की प्रदर्शनी का उद्घाटन भारत सरकार के राज्य सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री अजय टम्टा द्वारा किया गया।

यह प्रदर्शनी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों एवं स्वयं सहायता समूहों द्वारा आयोजित की गई थी। मुख्य अतिथि ने सभी के प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर “विकसित राष्ट्र के लिए भारत में श्रीअन्न की पुनः खोज (रिमाइंडर-2025)” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गई।

संगोष्ठी में अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि अजय टम्टा ने श्रीअन्न को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की और कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत श्रीअन्न के संवर्धन में एक वैश्विक लीडर के रूप में उभर रहा है।

श्रीअन्न हमारी सांस्कृतिक विरासत और पोषण संबंधी धरोहर हैं। इनका पुनरुत्थान केवल भोजन के लिए ही नहीं, बल्कि किसानों की आय, राष्ट्रीय स्वास्थ्य और सतत कृषि के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार श्रीअन्न की खेती, प्रसंस्करण और विपणन को सशक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने यह भी बताया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) तथा प्रधानमंत्री पोषण अभियान, आंगनबाड़ी आदि जैसी योजनाओं में श्रीअन्न को सम्मिलित करने का प्रयास किया जाएगा।

विशिष्ट अतिथि के रूप में “मिलेट मैन ऑफ तेलंगाना” के नाम से प्रसिद्ध वीर शेट्टी पाटिल ने श्रीअन्न उद्यमिता में अपनी सफलता की कहानी साझा की।

उन्होंने श्रीअन्न को एक व्यावसायिक अवसर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया और कहा कि यदि हम मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग एवं प्रत्यक्ष विपणन पर ध्यान केंद्रित करें, तो श्रीअन्न ग्रामीण उद्यमिता की रीढ़ बन सकता है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे शहरी आहार में श्रीअन्न को एक आधुनिक और आकर्षक विकल्प के रूप में प्रस्तुत करें।

कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कृषि क्षेत्र में पंतनगर विश्वविद्यालय की अग्रणी भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि “हरित क्रांति” का नेतृत्व करने के बाद अब पंतनगर विश्वविद्यालय “श्रीअन्न क्रांति” के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा कि श्रीअन्न जलवायु-अनुकूल फसलें हैं जिनके स्वास्थ्य लाभ अनेक हैं। इन्हें उगाने में कम संसाधनों की आवश्यकता होती है और ये कृषि प्रणालियों को लचीला बनाती हैं।

उन्होंने विश्वविद्यालय की विभिन्न पहलों — जैसे प्रजातियों का विकास, कटाई उपरांत तकनीकें, एवं किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम — पर प्रकाश डाला और एक नई पहल की घोषणा करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय के 23 छात्रावासों में सप्ताह में दो दिन श्रीअन्न आधारित उत्पादों को भोजन में सम्मिलित किया जाएगा। इससे छात्रों को श्रीअन्न की पौष्टिकता से परिचित कराने में सहायता मिलेगी और समाज में इसकी स्वीकृति भी बढ़ेगी।

उन्होंने यह भी बताया कि उद्यान अनुसंधान केंद्र, पत्थरचट्टा में विकसित आम की एक प्रजाति का नाम “ऑपरेशन सिंदूर” के नाम पर रखा गया है।

उन्होंने वैज्ञानिकों और छात्रों से आह्वान किया कि वे आगामी 5 वर्षों में श्रीअन्न की एक ऐसी प्रजाति विकसित करें जो विश्वविद्यालय के साथ-साथ पहाड़ी किसानों के लिए भी लाभकारी हो, जिससे उनकी आमदनी में वृद्धि हो सके।

उन्होंने यह जानकारी भी दी कि सेना के साथ हुए समझौते के तहत, सेना के भोजन में श्रीअन्न आधारित उत्पादों के समावेश हेतु सेना के 17 शेफ को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

कार्यक्रम संयोजक एवं निदेशक (शोध) डॉ. ए.एस. नैन ने तीन-दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की और कहा कि कुपोषण से निपटने एवं ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए श्रीअन्न को कृषि पद्धतियों, आधुनिक आहार एवं खाद्य नीतियों की मुख्यधारा में लाना आवश्यक है।

आयोजन सचिव एवं अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. ए.एस. जीना ने संगोष्ठी के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जनरल बिपिन सिंह रावत संस्थान के तत्वावधान में श्रीअन्न महोत्सव के अंतर्गत वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, पोस्टर एवं स्लोगन प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, साथ ही छात्रों को श्रीअन्न के महत्व से अवगत कराने हेतु व्याख्यानमाला भी आयोजित की जा रही है।

प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले स्थानीय विद्यालयों के बच्चों एवं विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को मुख्य अतिथि एवं कुलपति द्वारा पुरस्कृत किया गया। डा. अर्चना कुशवाहा, सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय, एवं अन्य लेखकों द्वारा लिखित श्रीअन्न पर आधारित 77 व्यंजनों की पुस्तक का विमोचन भी किया गया।

कार्यक्रम का समापन संयुक्त निदेशक (शोध) डॉ. पी.के. सिंह के औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने गणमान्य अतिथियों, आयोजकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

अपराह्न में आयोजित तकनीकी सत्र में डा. सत्येन यादव (अध्यक्ष, मिलेट इनिशिएटिव), डा. मुजिबर रहमान खान (पूर्व अधिष्ठाता, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय), और वीर शेट्टी पाटिल ने श्रीअन्न (मोटे अनाज) पर विस्तृत व्याख्यान दिए। प्रतिभागियों द्वारा मौखिक एवं पोस्टर प्रस्तुतियां भी दी गईं।

इस संगोष्ठी में शोधकर्ताओं, किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों, छात्रों एवं उद्यमियों की सक्रिय भागीदारी रही। साथ ही विश्वविद्यालय के कुलसचिव, अधिष्ठाता, निदेशकगण, विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

Yogi Varta

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