हिमालय की वादियों में दुर्लभ स्टेपी ईगल का हुआ दीदार
उत्तराखंड के चमोली जनपद स्थित विश्व प्रसिद्ध नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान से इस वर्ष एक बेहद सुखद और उत्साहजनक खबर सामने आई है। जोशीमठ (ज्योतिर्मठ) क्षेत्र के अंतर्गत जोशीधार इलाके में दुर्लभ प्रजाति के स्टेपी ईगल का पहली बार स्पष्ट रूप से कैमरे में कैद होना वन विभाग, पक्षी विशेषज्ञों और प्रकृति प्रेमियों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
पक्षी गणना अभियान के दौरान मिला संकेत
वन विभाग द्वारा नियमित रूप से चलाए जा रहे पक्षी गणना अभियान के दौरान यह महत्वपूर्ण अवलोकन दर्ज किया गया। ई-बर्डिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगभग आठ स्टेपी ईगल की उपस्थिति दर्ज की गई। अधिकारियों के अनुसार यह संख्या इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में प्रवासी शिकारी पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण मौजूद है।
स्टेपी ईगल एक बड़ा, शक्तिशाली शिकारी पक्षी होता है, जिसका रंग गहरा भूरा होता है और जिसके पंखों का फैलाव लगभग दो मीटर तक हो सकता है। यह मुख्य रूप से छोटे स्तनधारियों, सरीसृपों तथा मृत पशुओं को खाकर पारिस्थितिक तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मृत जीवों को खाने के कारण यह प्रकृति की सफाई व्यवस्था का भी एक अहम हिस्सा माना जाता है।
‘लुप्तप्राय’ श्रेणी में शामिल
स्टेपी ईगल को अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की रेड लिस्ट में ‘लुप्तप्राय’ श्रेणी में रखा गया है। बदलते जलवायु पैटर्न, विद्युत तारों से टकराव, शिकार और प्राकृतिक आवास में कमी के कारण इसकी संख्या में पिछले वर्षों में गिरावट दर्ज की गई है।
यह पक्षी मुख्य रूप से मध्य एशिया के घास के मैदानों में प्रजनन करता है और कज़ाकिस्तान का राष्ट्रीय पक्षी भी है। प्रजनन काल समाप्त होने के बाद यह लंबी दूरी का प्रवास करता है और सर्दियों के दौरान दक्षिण एशिया के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर हिमालयी क्षेत्रों में दिखाई देता है।
जैव विविधता के लिए सकारात्मक संकेत
वन क्षेत्राधिकारी चेतना कांडपाल के अनुसार, नंदा देवी क्षेत्र में स्टेपी ईगल की मौजूदगी यह दर्शाती है कि यहां का प्राकृतिक आवास, खाद्य श्रृंखला और जैव विविधता संतुलित स्थिति में है। शिकारी पक्षियों की उपस्थिति पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है, क्योंकि ये खाद्य श्रृंखला के शीर्ष पर होते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में भी इस प्रकार के दुर्लभ प्रवासी पक्षियों का आगमन जारी रहता है, तो यह प्रदेश की पारिस्थितिकी के लिए अत्यंत शुभ संकेत होगा। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि संरक्षण प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
संरक्षण की अपील
वन विभाग ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि वे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान न पहुंचाएं, प्लास्टिक और अन्य कचरे का प्रयोग सीमित करें तथा किसी भी दुर्लभ प्रजाति की सूचना तुरंत विभाग को दें।
नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान, जो पहले से ही अपनी समृद्ध जैव विविधता और संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी के लिए प्रसिद्ध है, अब स्टेपी ईगल की इस दुर्लभ उपस्थिति के कारण एक बार फिर चर्चा में है। यह घटना न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के लिए प्रकृति संरक्षण के क्षेत्र में एक सकारात्मक संदेश लेकर आई है।

