डिजिटल ठगों पर कसेगा शिकंजा : उत्तराखंड के दो बड़े जिलों में बनेंगे साइबर थाने

डिजिटल ठगों पर कसेगा शिकंजा : उत्तराखंड के दो बड़े जिलों में बनेंगे साइबर थाने

डिजिटल युग के साथ जहां जीवन आसान हुआ है, वहीं साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। उत्तराखंड जैसे शांत और पर्वतीय राज्य में भी साइबर ठगी के मामलों में तेज़ी से वृद्धि हो रही है।

मोबाइल, इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई और सोशल मीडिया के ज़रिए आम जनता को शिकार बनाया जा रहा है।

राज्य में साइबर अपराध की गंभीरता को देखते हुए अब शासन और पुलिस विभाग संवेदनशील और तकनीकी रूप से सशक्त ढांचे की ओर बढ़ रहे हैं।

हरिद्वार और नैनीताल में खुलेंगे साइबर थाने

उत्तराखंड पुलिस विभाग ने हरिद्वार और नैनीताल जिलों में नई साइबर थाना इकाइयां स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार कर राज्य शासन को भेज दिया है। ये दोनों जिले आबादी, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों के कारण साइबर अपराधियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनते जा रहे हैं।

वर्तमान समय में केवल देहरादून और ऊधमसिंहनगर (रुद्रपुर) में साइबर थाने हैं। बाकी जिलों में सिर्फ साइबर सेल कार्यरत हैं, जिनकी भूमिका सीमित है।

हर जिले में हो साइबर थाना

पुलिस विभाग का दीर्घकालिक लक्ष्य है कि प्रदेश के हर जिले में साइबर थाना खोला जाए। पहले चरण में हरिद्वार और नैनीताल को प्राथमिकता दी गई है। भविष्य में अपराध के आंकड़ों के आधार पर अन्य जिलों में भी साइबर थानों की स्थापना की जाएगी।

अपराध के आंकड़े चिंताजनक

साल दर साल उत्तराखंड में साइबर ठगी के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं:

वर्ष                                    कुल साइबर ठगी (₹ करोड़)                 बचाई गई राशि (₹ करोड़)
2021                                              11.40                                                       1.18
2022                                              40.00                                                     2.44
2023                                              69.00                                                     7.31
2024 (जुलाई तक)                         167.00                                                   29.51
2025 (जुलाई तक)                          84.00                                                    12.08

राशि की रिकवरी दर बेहद कम है, जो पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती है। अपराधी तेजी से पैसे निकाल लेते हैं या उन्हें फर्जी खातों/क्रिप्टो में ट्रांसफर कर देते हैं।

साइबर सेल की स्थिति: केवल औपचारिकता?

हर जिले में साइबर सेल जरूर बनाई गई है, लेकिन इनमें जांच की गुणवत्ता और गहराई बेहद सीमित है। साइबर सेल में तैनात इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर अक्सर दूसरे कार्यों (मेला ड्यूटी, धरना, कानून व्यवस्था आदि) में व्यस्त रहते हैं।

तकनीकी उपकरण, प्रशिक्षण, और विशेषज्ञता की भारी कमी है। शिकायत दर्ज करने के बाद आगे की कार्रवाई अक्सर नहीं हो पाती है।

क्या फर्क लाएंगे नए साइबर थाने?

विशेष प्रशिक्षित स्टाफ की नियुक्ति होगी। तकनीकी उपकरण और ट्रैकिंग सिस्टम मुहैया कराए जाएंगे। अपराधियों की पहचान और नेटवर्क को ट्रेस करने में तेजी आएगी। बचाई गई ठगी की राशि में सुधार की उम्मीद।

जनता को साक्षरता अभियान और साइबर सुरक्षा जागरूकता के माध्यम से सतर्क किया जा सकेगा।

वक्त की मांग, सिस्टम की तैयारी

उत्तराखंड जैसे राज्य में जहां टूरिज्म, धार्मिक यात्राएं और डिजिटल बैंकिंग का उपयोग लगातार बढ़ रहा है, वहां साइबर सुरक्षा का मजबूत ढांचा अनिवार्य है।

हरिद्वार और नैनीताल में साइबर थानों की स्थापना एक जरूरी और सकारात्मक पहल है, जिससे न केवल अपराधियों पर शिकंजा कसा जा सकेगा, बल्कि जनता को राहत भी मिलेगी।

सुझाव और आगे की राह

हर साइबर थाने में 24×7 हेल्प डेस्क होनी चाहिए। साइबर जागरूकता अभियान स्कूलों, कॉलेजों और गांवों तक पहुंचाया जाए। रिकवरी रेट बढ़ाने के लिए बैंकिंग सिस्टम के साथ रीयल-टाइम इंटीग्रेशन किया जाए। विशेष साइबर फॉरेंसिक लैब्स की स्थापना की जाए।

यह पहल यदि प्रभावी रूप से लागू होती है, तो यह उत्तराखंड को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।

Yogi Varta

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