जब इरादे हों मजबूत, तो राह खुद बनती है
काण्डा ग्राम पंचायत की शांत वादियों में बसा एक छोटा सा पहाड़ी गांव आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुका है। यह गांव पोखरी विकासखंड के अंतर्गत आता है, जो अपने प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के लिए भी जाना जाता है। इन्हीं चुनौतियों के बीच कमल रावत और उनकी पत्नी रेखा देवी ने अपने परिश्रम और दृढ़ संकल्प से एक नई कहानी लिखी है।
पहाड़ों में खेती करना आसान नहीं होता। सीमित संसाधन, जंगली जानवरों का खतरा, सिंचाई की कमी और बाजार तक पहुंच की कठिनाई – ये सब समस्याएं अक्सर किसानों का हौसला तोड़ देती हैं। लेकिन कमल रावत ने इन चुनौतियों को अवसर में बदलने का निश्चय किया।
शुरुआत में उन्होंने पारंपरिक खेती को ही अपनाया, लेकिन धीरे-धीरे आधुनिक तकनीकों और बेहतर बीजों का प्रयोग करना शुरू किया। उनकी पत्नी रेखा देवी ने हर कदम पर उनका साथ दिया। खेत की तैयारी से लेकर फसल की देखभाल और बाजार तक पहुंचाने तक, दोनों ने मिलकर जिम्मेदारी संभाली।

मेहनत रंग लाई
आज उनके खेतों में मटर, बंद गोभी और प्याज की लहलहाती फसल तैयार होती है। पहाड़ी मिट्टी की उर्वरता और जैविक तरीकों के उपयोग ने उनकी फसल की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया।
उत्पादन अच्छा होने के साथ-साथ उन्हें बाजार से उचित मूल्य भी मिलने लगा। स्थानीय मंडियों में उनकी सब्जियों की मांग बढ़ी, क्योंकि गुणवत्ता और ताजगी दोनों उत्कृष्ट थीं। धीरे-धीरे उनकी आमदनी स्थिर और संतोषजनक हो गई।
बिना विशेष सरकारी सहायता के आत्मनिर्भरता
सबसे प्रेरणादायक बात यह है कि उन्होंने बिना किसी विशेष सरकारी सहायता के यह सफलता प्राप्त की। सीमित संसाधनों में रहकर भी उन्होंने हार नहीं मानी। उनका मानना है कि ‘इस धरती में अपार संभावनाएं हैं, बस जरूरत है मेहनत और लगन की।’
उनकी सफलता ने आसपास के युवाओं की सोच को भी बदला है। जो युवा पहले शहरों की ओर पलायन का विचार करते थे, वे अब अपने गांव में ही स्वरोजगार के अवसर तलाश रहे हैं।

क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव
वर्तमान में पोखरी विकासखंड के कई युवा खेती, बागवानी और अन्य स्वरोजगार के माध्यमों को अपना रहे हैं। यह परिवर्तन न केवल व्यक्तिगत स्तर पर, बल्कि पूरे गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
यदि जिला प्रशासन ऐसे मेहनती किसानों की पहचान कर उन्हें आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराए, तो यह प्रयास और अधिक सशक्त हो सकता है। स्थानीय उत्पादों को उचित मंच और पहचान देकर क्षेत्र को नई पहचान दी जा सकती है।
एक बड़ा सपना
कमल रावत का उद्देश्य केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारना नहीं है। वे चाहते हैं कि काण्डा ग्राम पंचायत के सभी स्थानीय उत्पादकों को पहचान मिले। उनका सपना है कि गांव के उत्पाद एक ब्रांड के रूप में पहचाने जाएं और पहाड़ के किसान आत्मसम्मान और समृद्धि के साथ जीवन यापन करें।
अपने परिवार के साथ निरंतर परिश्रम करते हुए वे इस लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं। उनकी यात्रा यह सिद्ध करती है कि कठिन परिस्थितियां सफलता की राह में बाधा नहीं, बल्कि प्रेरणा बन सकती हैं।
कमल रावत और रेखा देवी की यह कहानी हमें सिखाती है कि परिश्रम, विश्वास और दृढ़ संकल्प से समृद्धि का मार्ग स्वयं बनाया जा सकता है, और पहाड़ की धरती सचमुच अपार संभावनाओं से भरी है।

