जनरल अनिल चौहान के हर्षिल दौरे से विकास और संस्कृति को मिली नई रफ्तार

जनरल अनिल चौहान के हर्षिल दौरे से विकास और संस्कृति को मिली नई रफ्तार

सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण उत्तराखंड के हर्षिल क्षेत्र में मंगलवार को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान का दौरा कई मायनों में खास रहा। इस उच्चस्तरीय यात्रा ने सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और नागरिक-सैन्य समन्वय को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से सामने रखा।

हर्षिल पहुंचने पर जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने औपचारिक रूप से सीडीएस जनरल अनिल चौहान का स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने जनपद में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं, आधारभूत संरचना परियोजनाओं और प्रशासनिक गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

दौरे का मुख्य आकर्षण ‘हर्षिल सांस्कृतिक एवं विरासत केंद्र’ की आधारशिला रखना रहा। यह केंद्र क्षेत्र की समृद्ध परंपराओं, गढ़वाल के ऐतिहासिक गौरव और स्थानीय सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में अहम भूमिका निभाएगा। साथ ही, यह परियोजना पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

अपने दौरे के दौरान जनरल चौहान ने केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के अंतर्गत स्थानीय ग्रामीणों से संवाद किया। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को राष्ट्र निर्माण का अभिन्न हिस्सा बताते हुए उनकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि सीमांत गांव केवल भौगोलिक सीमाएं नहीं हैं, बल्कि देश की सांस्कृतिक और रणनीतिक मजबूती के आधार स्तंभ हैं।

सीडीएस ने क्षेत्र में तैनात सैनिकों से भी मुलाकात की और उनका मनोबल बढ़ाया। उन्होंने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और प्रतिकूल मौसम में भी सैनिकों द्वारा निभाई जा रही जिम्मेदारियों की सराहना करते हुए उनकी उच्च स्तर की ऑपरेशनल तैयारी को देश की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।

दौरे के क्रम में उन्होंने बगोरी गांव का भ्रमण किया, जहां स्थानीय निवासियों से मुलाकात कर सीमांत गांवों की जीवंतता बनाए रखने में उनके योगदान को महत्वपूर्ण बताया। इसके बाद वे मुखवा गांव पहुंचे और प्रसिद्ध मुखवा मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित रखने के लिए ग्रामीणों के प्रयासों की सराहना की।

यह दौरा स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार और सशस्त्र बल सीमावर्ती क्षेत्रों में समेकित विकास, सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण और नागरिक-सैन्य सहयोग को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। स्थानीय लोगों ने भी इस उच्चस्तरीय यात्रा को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा है, जिससे भविष्य में क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

— नीरज, उत्तरकाशी

Yogi Varta

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