परिवार के संस्कार ही अनुशासन की धुरी: कुलपति
गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्राओं को गांधी हॉल सभागार में संबोधित किया।
छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने सर्वप्रथम विश्वविद्यालय की विशेषताओं की जानकारी दी और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीवन में व्यक्तिगत अनुशासन का अत्यंत महत्व है और इसमें परिवार से मिले संस्कारों की अहम भूमिका होती है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अध्ययन के साथ-साथ खेल-कूद, व्यायाम, सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं में भी नियमित रूप से भाग लें। इससे व्यक्तित्व का समग्र विकास होता है।
उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा, विशेषकर विदेशों में प्रवेश के लिए शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों (एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज) का भी विशेष महत्व होता है। इसलिए विद्यार्थियों को प्रसन्न मन से पढ़ाई के साथ अन्य सार्थक गतिविधियों में भी भाग लेना चाहिए, ताकि उनके ज्ञान और कौशल दोनों में वृद्धि हो सके।
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने के बाद विद्यार्थियों की समग्र जिम्मेदारी संस्थान की होती है, इसलिए उन्हें तनावमुक्त होकर अपने अध्ययन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय का एडवाइजरी सिस्टम एक अनूठी व्यवस्था है, जिसमें एडवाइजर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हैं। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे नियमित रूप से अपने एडवाइजर से संपर्क बनाए रखें।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं, जैसे स्टेडियम, फिटनेस सेंटर तथा सांस्कृतिक और अन्य गतिविधियों के लिए विभिन्न समितियां। छात्रावासों में भी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं और भविष्य में इन्हें और सुदृढ़ किया जाएगा।
कुलपति ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने महाविद्यालय तक ही सीमित न रहें, बल्कि विश्वविद्यालय के अन्य महाविद्यालयों, विभिन्न शोध केंद्रों और प्रयोगशालाओं का भी भ्रमण करें। इससे उनके भीतर नवाचार की भावना विकसित होगी।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों में स्नातक स्तर पर ही दूसरे वर्ष से प्रोजेक्ट कार्य शुरू कर दिया जाता है, जिससे विद्यार्थियों की प्रोफाइल मजबूत होती है और उन्हें विदेशों में उच्च शिक्षा के अवसर प्राप्त करने में आसानी होती है। इस दिशा में यहां भी प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय अपने आप में एक बड़ा अवसर है और स्नातक के चार वर्ष विद्यार्थियों के जीवन का स्वर्णिम काल होते हैं, जिनका सही उपयोग उनके भविष्य को सकारात्मक दिशा दे सकता है।
छात्रावास व्यवस्था पर उन्होंने सुझाव दिया कि सभी छात्रावासों में सायंकालीन प्रवेश का समय एक समान होना चाहिए, जिसका निर्धारण अधिष्ठाता छात्र कल्याण द्वारा किया जाए। साथ ही, सभी छात्रावासों में शुद्ध पेयजल और वॉशिंग मशीन जैसी सुविधाओं की सुनिश्चित व्यवस्था होनी चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे उत्साहपूर्वक अध्ययन करें और एक सकारात्मक एवं पेशेवर (कॉर्पोरेट) दृष्टिकोण अपनाते हुए अपने व्यक्तित्व का समग्र विकास करें, जिससे उनका भविष्य उज्ज्वल बन सके।
कार्यक्रम के प्रारंभ में कुलसचिव डॉ. दीपा विनय ने कुलपति का स्वागत किया और उनके जीवन परिचय एवं उपलब्धियों से छात्राओं को अवगत कराया।
इस अवसर पर विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, सहायक अधिष्ठाता छात्र कल्याण, संचार निदेशक, विभिन्न छात्रावासों के वार्डन एवं सहायक वार्डन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव ने सभी उपस्थितजनों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

