पैतृक गांव पहुंचे सीडीएस जनरल अनिल चौहान, बचपन की यादें हुई ताजा
देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान के लिए उस समय एक बेहद भावुक और यादगार क्षण बन गया, जब वे अपने पैतृक गांव पहुंचे। करीब 40 वर्षों की लंबी सैन्य सेवा के बाद पहली बार उन्हें अपने गांव लौटने का अवसर मिला।
जनरल अनिल चौहान ने जैसे ही गांव की पगडंडियों पर कदम रखा, उनके चेहरे पर अलग ही सुकून और अपनापन झलकने लगा। बचपन की यादें, पुराने घर और पहाड़ की वही सादगी सब कुछ मानो एक बार फिर जीवंत हो उठा। यह दौरा केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं था, बल्कि अपनी जड़ों से दोबारा जुड़ने का एक खास अवसर बन गया।

बचपन की यादों से हुआ सामना
जनरल अनिल चौहान ने गांव में अपने पुराने दिनों को याद किया और गांव के लोगों से मिलते हुए उन्होंने आत्मीयता और अपनापन महसूस किया।
स्थानीय लोगों ने भी देश के शीर्ष सैन्य अधिकारी को अपने बीच पाकर गर्व और खुशी जाहिर की। हर कोई उनसे मिलने और उनके अनुभव सुनने को उत्सुक नजर आया।
इस दौरान उन्होंने अपने परिवारजनों से भी मुलाकात की। यह गांव उनके परिवार की कई पीढ़ियों की यादों को संजोए हुए है। बताया जाता है कि उनके पिता ने भी इसी गांव में आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी, जो इस स्थान से उनके गहरे रिश्ते को दर्शाता है।

प्रेरणा का बना केंद्र
जनरल चौहान की यह यात्रा गांव के युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई। सीमित संसाधनों वाले पहाड़ी क्षेत्र से निकलकर देश के सर्वोच्च सैन्य पद तक पहुंचना, उनकी मेहनत, अनुशासन और समर्पण का प्रतीक है।
उनकी मौजूदगी ने युवाओं को यह संदेश दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो, तो कोई भी ऊंचाई हासिल की जा सकती है।
इस मौके पर जनरल चौहान ने भी अपने गांव और संस्कृति के प्रति जुड़ाव को अहम बताया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति चाहे कितनी भी ऊंचाई क्यों न हासिल कर ले, उसकी असली पहचान उसकी जड़ों से ही होती है।

देवलगढ़ में सीडीएस ने की पूजा-अर्चना
सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने अपने उत्तराखंड दौरे के दौरान देवलगढ़ स्थित सिद्धपीठ राजराजेश्वरी मंदिर में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की सुख-समृद्धि और देश की सुरक्षा के लिए प्रार्थना की।
देवलगढ़ स्थित प्राचीन धार्मिक स्थल पर जनरल चौहान ने पूरे श्रद्धा भाव के साथ पूजा की। इस अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक माहौल देखने को मिला। स्थानीय पुजारियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न कराई गई।

स्थानीय लोगों में दिखा उत्साह
जनरल चौहान के आगमन को लेकर क्षेत्र में खासा उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मंदिर परिसर में पहुंचे और देश के शीर्ष सैन्य अधिकारी की एक झलक पाने के लिए उत्सुक नजर आए। लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और उनके साथ संवाद भी किया।
आध्यात्म और कर्तव्य का संगम
जनरल चौहान का यह दौरा न सिर्फ आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि यह संदेश भी देता है कि देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से भी जुड़े रहते हैं।

